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किस्सा एक शाम का… 

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मै और ब्रुनो(my dog) अभी रात्रिभोजन के बाद थोडा चलने के लिये निक्ले थे . मैने आगे देखा कि फुटपाथ पर आठ-दस लडके ईकठ्ठा होकर खडे थे. मै जैसे ही पास पहुची तो मुजे उन लोगो कि बाते सुनाई दी… मैने सुना और मे आगे बढ गई पर फिर मुजे मन हुआ कि मै उन लडको को कुछ सुनाऊ . मैने यु टर्न लिया. उन लडको के पास गई और बोली..’ऍक़स क्युझ मी.. आई एम सोरी मै आपको डिस्टर्ब कर रही हु लेकिन मैने सुना उस पर से लगा की आप भारतीय बंधारण(Indian Consitution) के बारे मे बात कर रहे हो. आजकल लडको का ग्रुप खडा हो तो लडकी या गाली की बाते ज्यादातर होती है पर आप लोग कितनी शान्ति से यहा ज्ञान बांट रहे हो! सीधी बात है आप सभी स्पर्धात्मक परिक्षा की तैयारी कर रहे होगे ! ”

”जी,हा…कही बैठने की जगह नही मिली तो यहा फुटपाथ पर बैठ गये”- एक ने हसकर जवाब दिया…

”मेरी आप सब को शुभकामना की ये परिक्षा मे आप सभी इतनी मेहनत कर शको की आप सभी उतीर्ण हो जाओ और आप सब को अच्छी नौकरी लग जाये ! ”

इतना कहकर मै और ब्रुनो चल दिये… उन लडको के चहेरे खील उठे थे….

आज के युवाओ को सिर्फ दिशा चाहिये… जब भी मै युवाधन को टाईमपास करते देखती हु तो उनके लिये मुजे बडा अफसोस होता है… बहुत ही कम युवाओ के पास दिशा है… अगर बेन्क मे हि जाना है,कलर्क ही बनना है या आई.एईस. या फिर केट से एम.बी.ए. ही करनी है तो साला एन्जिनियरिग और पेरामेडिकलमे लाखो कि फिझ खराब क्यु करते हो… बाप के पास पैसो का पेड है कया?? पर मैने बताया ना…दिशा नही ये ये युवाओ के पास… जब हम कोलेज मे थे तो हमारे पास भी ना थी ये दिशा…. पर सब भाग्यवान थोडे ही होते है हमारे जैसे जो पढाई खत्म होते ह नौकरी की परिक्षा के प्रथम प्रयासमे ही उतीर्ण हो जाये और जोब लग जाये…

सायन्स करो-आर्टस करो-कोमर्स करो… सब एक ही खेत के मुले है… स्कुल मे पढते थे तब सोचते थे की आर्टस वो लेता है जिसको दिमाग कम है, सायन्स लेने वाला तो आईन्सटाईन ही होता है. पर ईतने साल बाद जब खुद शिक्षक बने तो पता चला की… आर्टस हो या सायन्स हो… अगर दिल लग जाये तो सब एक ही है…और सभी ब्रान्च मे धन और मान मीलता है.. किसी भी व्यकति-वस्तु या विषय को सिर्फ उसके नाम या पहचान से ही मुल्य करता हो एसे इन्सान से ज्यादा बदतमीज और बदनसीब और कोई नही है…

और हा…. जिन लोगोने पोस्ट पढते वकत ये अनुमान लगाया हो की वो लडकोने मुजे छेडने की बात करी होगी इसलिये मे वापस गई होगी उन लोगो को फेसबुक का शुक्रिया करना चाहिये… क्युकि वो लोग एक हि चश्मे से देख शकते है की…” भाई..बहोत सारे लडके एक साथ हो तो वो लडकी को छेडते ही है”…ये लोग चंद सेकन्ड मे भुल गये की मेरे पास मेरा कुत्ता Bruno था… काश…फेसबुक वर्च्युअल ना होता… तो अनाबसनाब अनुमान करने वाले, कमेन्ट मे बीना कोई वजह या अकारण जगडा कर देने वाले, एव घटिया पोस्ट करने वालो के पीछे ब्रुनो को छोड देने मे कितना मजा आता…. 

ये पोस्ट पढने के लिये धन्यवाद..ये पोस्ट अच्छी लगे तो क्रिपया शेय़र करे..क्या पता ये पढकर किसीका कुछ भला हो जाये… किसि का मुस्कुराना भी तो भलाई का ही एक प्रकार है ..-

-नीकीता परमार -गांधीनगर गुजरात

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